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राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी की यह कड़ाई संगठन में सर्जरी का संकेत है
कोलकाता। विधानसभा चुनाव के महाकुंभ में जैसे-जैसे मतदान की तारीखें नजदीक आ रही हैं, तृणमूल कांग्रेस के भीतर अनुशासन और एकजुटता को लेकर सख्ती बढ़ती जा रही है। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और नंबर दो के नेता अभिषेक बनर्जी ने अब अपने ही संगठन के भीतर छिपे उन चेहरों को निशाने पर लिया है, जो पर्दे के पीछे रहकर विरोधियों की मदद कर रहे हैं। रायना में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अभिषेक ने कार्यकर्ताओं को सीधे शब्दों में आगाह किया कि वे बाहरी दुश्मनों से ज्यादा घर के भेदियों और गद्दारों से सावधान रहें। उनका यह तीखा प्रहार उन लोगों के लिए एक साफ चेतावनी है जो पार्टी का झंडा तो थामे हुए हैं, लेकिन जिनकी निष्ठा कहीं और है।
चुनावी सभा में भारी भीड़ को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि किसी भी युद्ध में हार बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से मिलती है। उन्होंने इशारा किया कि विपक्षी दलों की साजिशों को तभी खाद-पानी मिलता है जब संगठन के अंदर बैठे कुछ लोग निजी स्वार्थ या लालच में आकर विश्वासघात करते हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अपनी आंखों और कान खुले रखें और ऐसे किसी भी व्यक्ति को पहचानें जो पार्टी की रणनीतियों को लीक कर रहा है या गुपचुप तरीके से विरोधियों के साथ साठगांठ में लगा है। अभिषेक ने साफ कर दिया कि चुनाव के बाद ऐसे तत्वों के लिए तृणमूल कांग्रेस में कोई जगह नहीं होगी।
अभिषेक बनर्जी का यह बयान उस समय आया है जब भाजपा और अन्य विपक्षी दल तृणमूल के असंतुष्ट नेताओं पर डोरे डाल रहे हैं। संगठन के भीतर किसी भी प्रकार की सेंधमारी को रोकने के लिए उन्होंने कार्यकर्ताओं को चौकीदार की भूमिका निभाने को कहा है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि चुनावी मैदान में उतरते समय केवल वोट मांगना ही काफी नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि संगठन का अनुशासन न टूटे। अभिषेक का मानना है कि पार्टी को कमजोर करने की हर साजिश को जमीनी स्तर पर कार्यकर्ता ही नाकाम कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी की यह कड़ाई संगठन में सर्जरी का संकेत है। वे यह संदेश देना चाहते हैं कि ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी केवल वफादार सिपाहियों के साथ ही आगे बढ़ेगी। चुनाव के इस नाजुक मोड़ पर कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने और भीतरघात की संभावनाओं को खत्म करने के लिए यह एक सोची-समझी रणनीतिक चेतावनी है। अब देखना यह होगा कि अभिषेक के इस हंटर के बाद पार्टी के भीतर सुगबुगाहट कम होती है या फिर कुछ नए चेहरे बागी तेवर दिखाते हैं। फिलहाल, उनके इस भाषण ने कार्यकर्ताओं में नया जोश भरने के साथ-साथ संदिग्धों के बीच खौफ पैदा कर दिया है।